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17 मई, 2026 6 मिनट पठन

मांगलिक बनाम मंगल दोष: ज्योतिषीय अंतर जो आपको अवश्य जानना चाहिए

आम

आचार्य मीनाक्षी

एस्ट्रोपिनच योगदानकर्ता

मांगलिक बनाम मंगल दोष: ज्योतिषीय अंतर जो आपको अवश्य जानना चाहिए

मंगल, साहस और ऊर्जा का लाल ग्रह, संबंध ज्योतिष में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। कुंडली मिलान के दौरान 'मांगलिक' होने और 'मंगल दोष' होने को अक्सर एक ही मान लिया जाता है, जिससे बेवजह की चिंता पैदा होती है।

1. मांगलिक होने का क्या अर्थ है?

मांगलिक होना केवल एक स्थितिजन्य वर्गीकरण है। यदि जातक की कुंडली में मंगल लग्न, चंद्र या शुक्र से 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित है, तो उसे मांगलिक माना जाता है। चूंकि लगभग 40% से 50% कुंडलियों में यह स्थिति बनती है, इसलिए यह बहुत सामान्य है।

2. मंगल दोष क्या है?

मंगल दोष मंगल की स्थिति का वास्तविक नकारात्मक प्रभाव है। यदि मंगल अपनी स्वराशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में स्थित हो, या उस पर गुरु की शुभ दृष्टि हो, तो मंगल दोष निष्प्रभावी हो जाता है और साहस और वफादारी प्रदान करता है।

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