हम केवल एकाकी प्राणी नहीं हैं, बल्कि एक विशाल पैतृक वृक्ष की शाखाएं हैं। आपकी जन्म कुंडली आपके वंशज के भविष्य की निरंतरता और पैतृक कर्म (पितृ दोष) का खाका है।
1. संतान उत्पत्ति के संकेतक: पंचम भाव और सप्तमांश
संतान के सुख और समय की गणना के लिए एस्ट्रोपिनच इन आयामों को देखता है:
- पंचम भाव (पुत्र भाव): बुद्धि और संतान का प्राथमिक स्थान।
- सप्तमांश (D-7): संतान और वंश की सूक्ष्म वर्ग कुंडली।
- समय की गणना: जब गोचर का गुरु और शनि एक साथ पंचम भाव या पंचमेश को प्रभावित करते हैं, तो संतान उत्पत्ति का समय अनुकूल होता है।
